7:37 pm

chhand salila: anugeet chhand -sanjiv

छंद सलिला:
अनुगीतRoseछंद 

संजीव
*
छंद लक्षण:  जाति महाभागवत, प्रति पद २६ मात्रा, 
                   यति१६-१०, पदांत लघु 

लक्षण छंद:

    अनुगीत सोलह-दस कलाएँ , अंत लघु स्वीकार
    बिम्ब रस लय भाव गति-यतिमय , नित रचें साभार     
    
उदाहरण:

१. आओ! मैं-तुम नीर-क्षीरवत , एक बनें मिलकर
   देश-राह से शूल हटाकर , फूल रखें चुनकर     
   आतंकी दुश्मन भारत के , जा न सकें बचकर      
   गढ़ पायें समरस समाज हम , रीति नयी रचकर    

२. धर्म-अधर्म जान लें पहलें , कर्तव्य करें तब            
    वर्तमान को हँस स्वीकारें , ध्यान धरें कल कल
    किलकिल की धारा मोड़ें हम , धार बहे कलकल 
    कलरव गूँजे दसों दिशा में , हरा रहे जंगल    

३. यातायात देखकर चलिए , हो न कहीं टक्कर          
    जान बचायें औरों की , खुद आप रहें बचकर  
    दुर्घटना त्रासद होती है , सहें धीर धरकर  
    पीर-दर्द-दुःख मुक्त रहें सब , जीवन हो सुखकर
                         *********  
(अब तक प्रस्तुत छंद: अखण्ड, अग्र, अचल, अचल धृति, अनुगीत, अरुण, अवतार, अहीर, आर्द्रा, आल्हा, इंद्रवज्रा, उड़ियाना, उपमान, उपेन्द्रवज्रा, उल्लाला, एकावली, कुकुभ, कज्जल, कामरूप, कामिनीमोहन, काव्य, कीर्ति, कुण्डल, कुडंली, गीता, गीतिका, गंग, घनाक्षरी, चौबोला, चंडिका, चंद्रायण, छवि, जग, जाया, तांडव, तोमर, त्रिलोकी, दिक्पाल, दीप, दीपकी, दोधक, दृढ़पद, नित, निधि, निश्चल, प्लवंगम्, प्रतिभा, प्रदोष, प्रभाती, प्रेमा, बाला, भव, भानु, मंजुतिलका, मदनअवतार, मदनाग, मधुभार, मधुमालती, मनहरण घनाक्षरी, मनमोहन, मनोरम, मानव, माली, माया, माला, मोहन, मृदुगति, योग, ऋद्धि, रसामृत, रसाल, राजीव, राधिका, रामा, रूपमाला, रोला, लीला, वस्तुवदनक, वाणी, विरहणी, विशेषिका, शक्तिपूजा, शशिवदना, शाला, शास्त्र, शिव, शुभगति, शोभन, शंकर, सरस, सार, सारस, सिद्धि, सिंहिका, सुखदा, सुगति, सुजान, सुमित्र, संपदा, हरि, हेमंत, हंसगति, हंसी)

11:15 pm

chhand salila: kamroop chhand -sanjiv

छंद सलिला:
कामरूपRoseछंद 

संजीव
*
छंद लक्षण: जाति महाभागवत, प्रति पद मात्रा २६, यति ९-७-१०, पदांत गुरु लघु 

लक्षण छंद:

    कामरूप छंद , दे आनंद , सँग खुशियां अनंत
    मुँहदेखा नहीं , सच हमेशा , खरा कहे ज्यों संत   
    नौ निधि सात सुर , दस दिशाएँ , करें सुकीर्ति गान 
    अंत में अंतर , भुला लघु-गुरु , लगे सदा समान    
      
उदाहरण:

१. गले लग जाओ , प्रिये! आओ , करो पूरी चाह
   गीत मिल गाओ , प्रिये! आओ , मिटे सारी दाह  
   दूरियाँ कम कर , मुस्कुराओ , छिप भरो मत आह    
   मन मिले मन से , खिलखिलाओ , करें मिलकर वाह  

२. चलें विद्यालय , पढ़ें-लिख-सुन , गुनें रहकर साथ          
    करें जुटकर श्रम , रखें ऊँचा , हमेशा निज माथ
    रोप पौधे कुछ , सींच हर दिन , दें धरा को हास
    प्रदूषण हो कम , हँसे जीवन / कर सदैव प्रयास 

३. ईमान की हो , फिर प्रतिष्ठा , प्रयासों की जीत
    दुश्मनों की हो , पराजय ही / विजय पायें मीत
    आतंक हो अब , खत्म नारी , पा सके सम्मान
    मुनाफाखोरी ,  न रिश्वत हो , जी सके इंसान

४. है क्षितिज के उस ओर भी , सम्भावना-विस्तार
    है ह्रदय के इस ओर भी , मृदु प्यार लिये बहार
    है मलयजी मलय में भी , बारूद की दुर्गंध
    है प्रलय की पदचाप सी , उठ रोक- बाँट सुगंध   
                         *********  
(अब तक प्रस्तुत छंद: अखण्ड, अग्र, अचल, अचल धृति, अरुण, अवतार, अहीर, आर्द्रा, आल्हा, इंद्रवज्रा, उड़ियाना, उपमान, उपेन्द्रवज्रा, उल्लाला, एकावली, कुकुभ, कज्जल, कामरूप, कामिनीमोहन, काव्य, कीर्ति, कुण्डल, कुडंली, गीता, गीतिका, गंग, घनाक्षरी, चौबोला, चंडिका, चंद्रायण, छवि, जग, जाया, तांडव, तोमर, त्रिलोकी, दिक्पाल, दीप, दीपकी, दोधक, दृढ़पद, नित, निधि, निश्चल, प्लवंगम्, प्रतिभा, प्रदोष, प्रभाती, प्रेमा, बाला, भव, भानु, मंजुतिलका, मदनअवतार, मदनाग, मधुभार, मधुमालती, मनहरण घनाक्षरी, मनमोहन, मनोरम, मानव, माली, माया, माला, मोहन, मृदुगति, योग, ऋद्धि, रसामृत, रसाल, राजीव, राधिका, रामा, रूपमाला, रोला, लीला, वस्तुवदनक, वाणी, विरहणी, विशेषिका, शक्तिपूजा, शशिवदना, शाला, शास्त्र, शिव, शुभगति, शोभन, शंकर, सरस, सार, सारस, सिद्धि, सिंहिका, सुखदा, सुगति, सुजान, सुमित्र, संपदा, हरि, हेमंत, हंसगति, हंसी)

10:35 pm

chhand salila: jhulna chhand -sanjiv

छंद सलिला:
झूलनाRoseछंद 

संजीव
*
छंद लक्षण:  जाति महाभागवत, प्रति पद २६ मात्रा, 
                   यति ७-७-७-५, पदांत गुरु लघु 

लक्षण छंद:

    हरि! झूलना , मत भूलना , राधा कहें , हँस झूम
    घन श्याम को , झट दामिनी , ने लिया कर , भर चूम    
    वेणु सुर ऋषि , वचन सुनने , लास-रास क/रें मौन 
    कौन किसका , कब हुआ है? , बोल सकता / रे! कौन?   
      
उदाहरण:

१. मैं-तुम मिले , खो, गुम हुए , फिर हम बने , इकजान
   पद-पथ मिले , मंज़िल हुए , हमदम हुए , अनजान   
   गेसू खुले , टेसू खिले , सपने हुए , साकार     
   पलकें खुलीं , अँखियाँ मिलीं , अपने हुए , दिलदार   

२. पथ पर चलें , गिर-उठ बढ़ें , नभ को छुएँ , मिल साथ           
    प्रभु! प्रार्थना , आशीष दें , ऊँचा उठा , हो माथ
    खुद से न आँ/खें चुराने , की घड़ी आ/ये तात!
    हौसलों की , फैसलों से , मत हो सके , रे मात   

३. देश-गौरव , से नहीं है , अधिक गौरव , सच मान        
    देश हित मर-मर अमर हों , नित्य शहीद, हठ ठान 
    है भला या , है बुरा- है , देश अपना , मजबूत 
    संभावना , सच करेंगे , संकल्प है , शुभ-पूत
                         *********  
(अब तक प्रस्तुत छंद: अखण्ड, अग्र, अचल, अचल धृति, अरुण, अवतार, अहीर, आर्द्रा, आल्हा, इंद्रवज्रा, उड़ियाना, उपमान, उपेन्द्रवज्रा, उल्लाला, एकावली, कुकुभ, कज्जल, कामरूप, कामिनीमोहन, काव्य, कीर्ति, कुण्डल, कुडंली, गीता, गीतिका, गंग, घनाक्षरी, चौबोला, चंडिका, चंद्रायण, छवि, जग, जाया, तांडव, तोमर, त्रिलोकी, दिक्पाल, दीप, दीपकी, दोधक, दृढ़पद, नित, निधि, निश्चल, प्लवंगम्, प्रतिभा, प्रदोष, प्रभाती, प्रेमा, बाला, भव, भानु, मंजुतिलका, मदनअवतार, मदनाग, मधुभार, मधुमालती, मनहरण घनाक्षरी, मनमोहन, मनोरम, मानव, माली, माया, माला, मोहन, मृदुगति, योग, ऋद्धि, रसामृत, रसाल, राजीव, राधिका, रामा, रूपमाला, रोला, लीला, वस्तुवदनक, वाणी, विरहणी, विशेषिका, शक्तिपूजा, शशिवदना, शाला, शास्त्र, शिव, शुभगति, शोभन, शंकर, सरस, सार, सारस, सिद्धि, सिंहिका, सुखदा, सुगति, सुजान, सुमित्र, संपदा, हरि, हेमंत, हंसगति, हंसी)

8:23 pm

chhand salila: geeta chhand -sanjiv

छंद सलिला:

गीता Roseछंद 

संजीव
*
छंद-लक्षण: जाति महाभागवत, प्रति पद - मात्रा २६ मात्रा, यति १४ - १२, पदांत गुरु लघु.

लक्षण छंद:

    चौदह भुवन विख्यात है , कुरु क्षेत्र गीता-ज्ञान
    आदित्य बारह मास नित , निष्काम करे विहान  
    अर्जुन सदृश जो करेगा , हरी पर अटल विश्वास  
    गुरु-लघु न व्यापे अंत हो , हरि-हस्त का आभास    
     संकेत: आदित्य = बारह 
उदाहरण:

१. जीवन भवन की नीव है , विश्वास- श्रम दीवार
   दृढ़ छत लगन की डालिये , रख हौसलों का द्वार   
   ख्वाबों की रखें खिड़कियाँ , नव कोशिशों का फर्श   
   सहयोग की हो छपाई , चिर उमंगों का अर्श 

२. अपने वतन में हो रहा , परदेश का आभास         
    अपनी विरासत खो रहे , किंचित नहीं अहसास
    होटल अधिक क्यों भा रहा? , घर से हुई क्यों ऊब?
    सोचिए! बदलाव करिए , सुहाये घर फिर खूब 

३. है क्या नियति के गर्भ में , यह कौन सकता बोल?
    काल पृष्ठों पर लिखा क्या , कब कौन सकता तौल?
    भाग्य में किसके बदा क्या , पढ़ कौन पाया खोल?
    कर नियति की अवमानना , चुप झेल अब भूडोल।

४. है क्षितिज के उस ओर भी , सम्भावना-विस्तार
    है ह्रदय के इस ओर भी , मृदु प्यार लिये बहार
    है मलयजी मलय में भी , बारूद की दुर्गंध
    है प्रलय की पदचाप सी , उठ रोक- बाँट सुगंध   
                         *********  
(अब तक प्रस्तुत छंद: अखण्ड, अग्र, अचल, अचल धृति, अरुण, अवतार, अहीर, आर्द्रा, आल्हा, इंद्रवज्रा, उड़ियाना, उपमान, उपेन्द्रवज्रा, उल्लाला, एकावली, कुकुभ, कज्जल, कामिनीमोहन, काव्य, कीर्ति, कुण्डल, कुडंली, गीता, गीतिका, गंग, घनाक्षरी, चौबोला, चंडिका, चंद्रायण, छवि, जग, जाया, तांडव, तोमर, त्रिलोकी, दिक्पाल, दीप, दीपकी, दोधक, दृढ़पद, नित, निधि, निश्चल, प्लवंगम्, प्रतिभा, प्रदोष, प्रभाती, प्रेमा, बाला, भव, भानु, मंजुतिलका, मदनअवतार, मदनाग, मधुभार, मधुमालती, मनहरण घनाक्षरी, मनमोहन, मनोरम, मानव, माली, माया, माला, मोहन, मृदुगति, योग, ऋद्धि, रसामृत, रसाल, राजीव, राधिका, रामा, रूपमाला, रोला, लीला, वस्तुवदनक, वाणी, विरहणी, विशेषिका, शक्तिपूजा, शशिवदना, शाला, शास्त्र, शिव, शुभगति, शोभन, शंकर, सरस, सार, सारस, सिद्धि, सिंहिका, सुखदा, सुगति, सुजान, सुमित्र, संपदा, हरि, हेमंत, हंसगति, हंसी)

8:56 pm

chhand salila: geetika chhand -sanjiv

छंदRose सलिला: 

गीतिका छंद 

संजीव 
*
छंद लक्षण: प्रति पद २६ मात्रा, यति १४-१२, पदांत लघु गुरु 

लक्षण छंद: 

    लोक-राशि गति-यति भू-नभ , साथ-साथ ही रहते 
    लघु-गुरु गहकर हाथ- अंत , गीतिका छंद कहते 

उदाहरण:

​​१. चौपालों में सूनापन , खेत-मेड में झगड़े 
    उनकी जय-जय होती जो , धन-बल में हैं तगड़े 
    खोट न अपनी देखें , बतला थका आइना 
    कोई फर्क नहीं पड़ता , अगड़े हों या पिछड़े

२. आइए, फरमाइए भी , ह्रदय में जो बात है       
   
​ ​
क्या पता कल जीत किसकी , और किसकी मात है   
   
​ ​
झेलिये धीरज धरे रह , मौन जो हालात है   
   
​ ​
एक सा रहता समय कब
​?​
 , रात लाती प्रात है

​३. ​सियासत ने कर दिया है , विरासत से दूर क्यों?
    हिमाकत ने कर दिया है , अजाने मजबूर यों
    विपक्षी परदेशियों से , अधिक लगते दूर हैं 
    दलों की दलदल न दल दे, आँख रहते सूर हैं 
facebook: sahiyta salila / sanjiv verma 'salil' 

8:28 pm

chhans salila: shankar chhand -sanjiv



छंद सलिला:   ​​​

शंकर छंद ​

संजीव
*
छंद-लक्षण: जाति महाभागवत, प्रति पद - मात्रा २६ मात्रा, यति १६ - १०, पदांत गुरु लघु.

लक्षण छंद:

बम बम भोले जय शिव शंकर , गौरीपति उमेश 
सोलह गुण-दस इन्द्रियपति जय , सदय हों सर्वेश  
गुरु-लघु सबका अंत तुम्हीं में , तुम्हीं सबके नाथ 
सुर नर असुर झुकाते प्रभु! तव , पद पद्म में माथ  

उदाहरण:

१. जय-जय भारत भूमि सुपावन , मनुज को वरदान
   तरसें लेने जन्म देव भी , कवि करें गुणगान
   पुरवैया पछुआ मलयज , करें जीवन दान
   हिमगिरि सागर रक्षक अद्भुत , हर छंद रस-खान 

२. पैर जमीं पर जमा आसमां , पर कर हस्ताक्षर 
    कोई निरक्षर रहे न शेष , हर जन हो साक्षर 
    ख्वाब पाल जो अँखिया सोये , करे कर साकार 
    हर दिल दिल से जुड़े मिटाकर , आपसी तकरार
 
३.दिल की दुनिया का दौलत से , जोड़ मत संबंध 
   आस-प्यास का कभी हास से , हो नहीं अनुबंध
   जो पाया नाकाफी कहकर , और अधिक न जोड़
   तुझसे कम हो जहाँ उसीसे , करें तुलना-होड़ 
                     
                         *********  
(अब तक प्रस्तुत छंद: अखण्ड, अग्र, अचल, अचल धृति, अरुण, अवतार, अहीर, आर्द्रा, आल्हा, इंद्रवज्रा, उड़ियाना, उपमान, उपेन्द्रवज्रा, उल्लाला, एकावली, कुकुभ, कज्जल, कामिनीमोहन, काव्य, कीर्ति, कुण्डल, कुडंली, गंग, घनाक्षरी, चौबोला, चंडिका, चंद्रायण, छवि, जग, जाया, तांडव, तोमर, त्रिलोकी, दिक्पाल, दीप, दीपकी, दोधक, दृढ़पद, नित, निधि, निश्चल, प्लवंगम्, प्रतिभा, प्रदोष, प्रभाती, प्रेमा, बाला, भव, भानु, मंजुतिलका, मदनअवतार, मदनाग, मधुभार, मधुमालती, मनहरण घनाक्षरी, मनमोहन, मनोरम, मानव, माली, माया, माला, मोहन, मृदुगति, योग, ऋद्धि, रसामृत, रसाल, राजीव, राधिका, रामा, रूपमाला, रोला, लीला, वस्तुवदनक, वाणी, विरहणी, विशेषिका, शक्तिपूजा, शशिवदना, शाला, शास्त्र, शिव, शुभगति, शोभन, शंकर, सरस, सार, सारस, सिद्धि, सिंहिका, सुखदा, सुगति, सुजान, सुमित्र, संपदा, हरि, हेमंत, हंसगति, हंसी)

8:22 am

chhand salila: mdnag chhand -sanjiv



छंद सलिला:   ​​​

मदनाग छंद ​

संजीव
*
छंद-लक्षण: जाति अवतारी, प्रति पद - मात्रा २५ मात्रा, यति १७ - ८

लक्षण छंद:

कलाएँ सत्रह-आठ दिखाये, नटवर अपनी   
उगल विष नाग कालिया कोसे, किस्मत अपनी 
छंद मदनाग निराशाएं कर दूर, मगन हो
मुदित मन मथुरावासी हर्षित, मोद मगन हों 

उदाहरण:

१. देश की जयकार करते रहें, विहँस हम सभी
   आत्म का उद्धार करते रहें, विहँस हम सभी
   बुरे का प्रतिकार करते रहें, विहँस हम सभी
   भले का सहकार करते रहें, विहँस हम सभी 

२. काम कुछ अच्छा करना होगा, संकल्प करें
    नाम कुछ अच्छा वरना होगा, सुविकल्प करें 
    दाम हर चीज का होता नहीं, ये सच कह दें
    जान निज देश पर निसार 'सलिल' हर कल्प करें

३.जीत वही पाता जो फिसलकर, उठ भी सकता
   मंज़िल मिले उसे जो सम्हलकर, शुभ कर सकता
   होता घना अँधेरा धरा पर, जब-जब बेहद
   एक नन्हा दीप खुद जलकर सब, तम हर सकता
                   
                         *********  
(अब तक प्रस्तुत छंद: अखण्ड, अग्र, अचल, अचल धृति, अरुण, अवतार, अहीर, आर्द्रा, आल्हा, इंद्रवज्रा, उड़ियाना, उपमान, उपेन्द्रवज्रा, उल्लाला, एकावली, कुकुभ, कज्जल, कामिनीमोहन, काव्य, कीर्ति, कुण्डल, कुडंली, गंग, घनाक्षरी, चौबोला, चंडिका, चंद्रायण, छवि, जग, जाया, तांडव, तोमर, त्रिलोकी, दिक्पाल, दीप, दीपकी, दोधक, दृढ़पद, नित, निधि, निश्चल, प्लवंगम्, प्रतिभा, प्रदोष, प्रभाती, प्रेमा, बाला, भव, भानु, मंजुतिलका, मदनअवतार, मदनाग, मधुभार, मधुमालती, मनहरण घनाक्षरी, मनमोहन, मनोरम, मानव, माली, माया, माला, मोहन, मृदुगति, योग, ऋद्धि, रसामृत, रसाल, राजीव, राधिका, रामा, रूपमाला, रोला, लीला, वस्तुवदनक, वाणी, विरहणी, विशेषिका, शक्तिपूजा, शशिवदना, शाला, शास्त्र, शिव, शुभगति, शोभन, सरस, सार, सारस, सिद्धि, सिंहिका, सुखदा, सुगति, सुजान, सुमित्र, संपदा, हरि, हेमंत, हंसगति, हंसी)